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आत्‍मविश्‍वास की भारी कमी से जूझ रहे चीनी सैनिक, ड्रोन-मिसाइल बनाने को मजबूर हुआ ड्रैगन

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Authored by | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: Sep 20, 2021, 4:03 PM

Pla Soldiers Suffering From Lack Of Morale: चीन के सैनिक आत्‍मविश्‍वास की भारी कमी से परेशान हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह बना है, चीन की ‘एक बच्‍चा नीति।’ इसका खुलासा खुद चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने कर दिया है।

बीजिंग

दुनियाभर पर बादशाहत कायम करने के सपने देख रही चीनी सेना आत्‍मविश्‍वास की भारी कमी से जूझ रही है। यही नहीं खुद चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने गलती से अपनी सेना की इस बड़ी कमजोरी को उजागर कर दिया है। चीनी सैनिकों के आत्‍मविश्‍वास में कमी का एक खुलासा पीएलए के रेगिस्‍तान में मिसाइलों के परीक्षण के दौरान हुआ। वहीं चीन लगातार अपने यहां बच्‍चों की जन्‍म दर को बढ़ाने पर काम कर रहा है और उनकी शिक्षा पर आने वाले खर्च को भी कम करने में जुटा हुआ है।

जापानी अखबार निक्‍केई की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के इन सभी प्रयासों का मकसद अपने सैनिकों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाना है और साथ ही साथ लगातार चलने वाले युद्ध के दौरान उनकी सैन्‍य क्षमता में वृद्धि करना है। चीन पिछले एक दशक से दक्षिण चीन सागर में बहुत व्‍यस्‍त है और लगातार कृत्रिम द्वीप बना रहा है और वहां मिसाइलें तथा रेडॉर तैनात कर रहा है। चीन के इस कदम का मकसद विदेशी फाइटर जेट और युद्धक जहाजों को उस इलाके में प्रवेश से रोकना है।

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‘चीन के अंदर इतना विश्‍वास नहीं है कि वह अपने क्षेत्र की रक्षा कर सकेगा’

चीन ने अब परमाणु पनडुब्‍बी भी तैनात करना शुरू कर चुका है जो समुद्र के अंदर से मिसाइल दागने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें बेहद खतरनाक होती हैं और परमाणु युद्ध होने की सूरत में सेकंड स्‍ट्राइक के लिए सबसे कारगर हथियार हैं। इन पनडुब्बियों के बाद भी चीन लगातार अपने रेगिस्‍तानी इलाके में नए-नए मिसाइल साइलो बना रहा है जहां पर मिसाइलें और परमाणु हथियार रखे जा सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने भले ही समुद्र में इतने हथियार और कृत्रिम द्वीप बना लिए हैं लेकिन उसके अंदर इतना विश्‍वास नहीं है कि वह संघर्ष होने पर अपने क्षेत्र की रक्षा कर सकेगा।

इससे पहले वर्ष 2018 में चीनी सबमरीन जापान के सेनकाकू द्वीप के जलसीमा में घुसी थी और जापानी सेना ने उसे तत्‍काल पकड़ लिया था। मजबूरन तत्‍काल उसे पानी से बाहर निकलना पड़ा। उसने चीनी झंडा लहराया ताकि जापान उस पर हमला न कर दे। जापान और अमेरिका के कई अधिकारियों का मानना है कि यह घटना इस बात का सबूत है कि चीनी सैनिकों का आत्‍मविश्‍वास बहुत ही कमजोर है।

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चीनी सैनिकों के आत्‍मविश्‍वास में कमी की वजह ‘वन चिल्‍ड्रेन पॉलिसी’

चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने पिछले कई वर्षों से सेना पर पानी की तरह से पैसा बहा रही है। चीनी सेना की यह ताकत केवल मिसाइलों और टैकों में दिख रही है। वहीं उसके सैनिकों का आत्‍मविश्‍वास जस का तस बना हुआ है। चीनी सेना भले ही एयरक्राफ्ट कैरियर बना रही है लेकिन जापान के रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि पीएलए के एयरक्राफ्ट कैरियर युद्ध की सूरत में अपने मिलिट्री बंदरगाह से ही नहीं निकलेंगे। उन्‍हें डर सता रहा होगा कि कहीं हमला न हो जाए और हम डूब जाएं।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी सैनिकों के आत्‍मविश्‍वास में कमी की वजह चीन की लंबे समय से चली आ रही वन चिल्‍ड्रेन पॉलिसी है। इससे चीनी सेना दुनिया की ऐसी सेना बन गई है जिसमें मां-बाप की अकेली संतान सबसे ज्‍यादा है। बताया जा रहा है कि ऐसे सैनिकों की संख्‍या करीब 70 फीसदी है। चीनी संस्‍कृति में बच्‍चों का अपने मां-बाप और पूर्वजों की सेवा करना बेहद महत्‍वपूर्ण है। ऐसे में मां-बाप यह नहीं चाहते हैं कि उनके बच्‍चों की मौत हो। यही नहीं चीन में सैनिकों का सम्‍मान भी कम होता है। वहां कहा जाता है कि सम्‍मानित लोग सैनिक नहीं बनते हैं।



‘चीन से निपटने के लिए जापान, भारत को जवाबी रणनीति बनाना होगा’


इसी समस्‍या से निपटने के लिए चीन अब मानवरहित विमानों यानि ड्रोन और मिसाइलों पर ज्‍यादा फोकस किए हुए है। चीन की ओर से तैनात की गईं मिसाइलों की संख्‍या कई हजार है। चीन की रणनीति है कि अगर संघर्ष हो तो पहले बड़े पैमाने पर मिसाइलें दाग दो और फिर युद्ध के मोर्चे से हट जाओ। उसने यह रणनीति सोवियत संघ से सीखी है। चीनी सेना के पास सैनिकों की कमी पड़ रही है और इसी को देखते हुए मिसाइलों तथा ड्रोन को बढ़ाने का सिलसिला जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की इस रणनीति से निपटने के लिए जापान, भारत और अन्‍य देशों को तत्‍काल जवाबी रणनीति बनाना होगा। इसमें अत्‍याधुनिक हथियार, रेल गन, एनर्जी वेपन की तैनाती शामिल है।


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